रविवार, 20 जून 2010

बिखरे सितारे:रात अंधेरी...

पूजा को दिन प्रतिदिन सदमे मिलतेही जा रहे थे...एक से उभर नही पाती और दूसरा बाहें पसारे आगे खड़ा होता....

( गतांक: मैंने कमरे से बाहर निकल जाना चाह,लेकिन केतकी मानो चंडिका का रूप धारण कर चुकी थी...उसने मेरी बाँह पकड़ दोबारा कमरे में खींच लिया...उसकी आँखों में आग थी...जिसे मेरे आँसूं चाहकर  भी बुझा न पा रहे थे..अब आगे पढ़ें)

अपने आप को ऐसे मोड़ों पे खड़ा पा रही थी,जहाँ लगातार दिशा भ्रम महसूस होता...समझ नही पाती की,क्या करना चाहिए..किस राह निकलना सही होगा?

केतकी की मानसिकता समझ रही थी..वह लगातार दो पाटों के बीछ पीसी जा रही थी..अमन ने तो  अपनेआप को अलग कर लिया था. ऐसे अशांत माहौल में शांती कैसे ला सकती थी मै? केतकी के लिए दिल तार तार हुआ जा रहा था. बेटी को माँ के आँचल तले भी दर्द से निजात न मिले तो जाये कहाँ?
कुछ रोज़ केतकी गौरव के पास गयी. उसे वहाँ कुछ काम था.



पिछले दिनों के मानसिक आघातों के कारण मेरी तबियत काफ़ी खराब चल रही थी. रात में एक नर्स को मैंने मेरे पास बुलाना शुरू किया था.
माँ   परेशान हो स्वयं मेरे पास चली आयीं.

जब परिवार के एक सदस्य के साथ कुछ घटता   है,तो पूरे परिवार पे असर पड़ता है.."

मेरा दिल डूबता जा रहा था. मै उस दिनों,ब्लॉग पे, 'उजागर होता सत्य" इस शीर्षक तले एक मालिका लिख रही थी.
 एक महिला ब्लोगर  का मुझे sms आया," आपको भगवान् के घर भी माफी नही मिल सकती. समस्त नारी जात आप के ऊपर शर्मिन्दा है!"

कैसी अजीब दुनिया है! जो सनसनी खेज़ है,विश्वास उसपे रखती है!
यह बरदाश्त की इन्तेहा थी. एक माँ की लाश पर से गुज़र यह दुनिया  उसकी बिटिया तक पहुँची.....गौरव,जो एक जानी मानी कंपनी में सायबर  क्राइम का बिभाग प्रमुख था,खुद धोखा खा  गया...साथ बिटिया भी...हश्र यह हुआ की,मेरा ब्लॉग मुझे हटा देना पडा.

मुझे गर अपने पती या बच्चों के बारेमे कोई कुछ हज़ार बार कहता तो मै एक बार भी न मानती. और गर सच भी होता तो ऐसे समय में उनके साथ एक टीले  के तरह  खड़ी रह जाती..उन्हें अलग थलग न करती...पर मेरी क़िस्मत में यह नही था...बिटिया ने कहा," माँ अब तुम पर से विश्वास उठ गया है..न जाने फिर कब लौटेगा..! उन लोगों  के पास तुम्हारी तस्वीरें और आवाज़ कहाँ से आयी? "
मै :" मै हज़ार बार कह चुकी हूँ,की,मेरी शूटिंग भी हुई थी और रेकॉर्डिंग भी! और गर नही है विश्वास तो उन्हीं लोगों  से पूछ लो...और मै क्या कह सकती हूँ...इस विषय पे मै और एक शब्द भी सुनना नही चाहती...ख़ास कर तुम से..मै आत्म ह्त्या कर लूँगी...मेरे बरदाश्त की अब हद हो गयी है...!" खैर!
 मै बहुत कुछ  खो चुकी थी...आत्म विश्वास और अपनों का विश्वास..खासकर अपनी बेटी का..गौरव के अविश्वास की तो आदत पड़ गयी थी...

(यह पोस्ट संपादित है. शायद सिलसिला ना मिले).

क्रमश:
( एक आखरी किश्त बची है...उसे क्षमा लिखेगी).

15 टिप्‍पणियां:

ali ने कहा…

इस जीवनी को पढ़ते हुए मन में , घटनाओं के प्रति इस कदर अनिश्चय भर गया है कि उस व्यक्ति का माफीनामा / पश्चाताप भी नाकाफी लग रहा है क्या वाकई में हालात सुधरेंगे ?

ज्योति सिंह ने कहा…

apni tippani karne hi jaa rahi thi lekin ali ji ki baat man ko chhoo gayi is karan main bhi unhi se sahmat ho gayi .lekhni ka to jawab nahi .sundar .

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

पढते जाने के सिवाय कर भी क्या सकती हूं? हां उस वक्त पूजा पर क्या गुज़री होगी, महसूस कर पा रही हूं.

Apanatva ने कहा…

badee hee dukh bharee dastan hai...kalpana se hee sihar uthate hai hum to....

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

Kshmaji badhai.very nice post thanks with regard.

संजय भास्कर ने कहा…

ye jeevani bahut hi maarmik hai, dardanaak bhi......

वन्दना ने कहा…

ऐसे हालात सहकर भी उनसे लडना ………………क्या कहूँ अब? बहुत मुश्किल होता है।

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

kya maaafinaame se kata hua dard laut sakta hai, wo khushiyan jiska hakdaar thi, jo na mila.......uska kya hoga......beti ke saamne.....apne ko girta hua dekhna.......kya ye sab laut sakta hai......:(

dard bhari rachna........

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा…

अगली किश्त की भी प्रतीक्षा रहेगी।
---------
इंसानों से बेहतर चिम्पांजी?
क्या आप इन्हें पहचानते हैं?

pragya ने कहा…

ऐसे अविश्वासी अपनों से तो पराए ही बेहतर..कम से कम वहाँ विश्वास की उम्मीद तो नहीं होती..

दिगम्बर नासवा ने कहा…

सौंदर्य रस में डूबी ... प्रेमिका की भाव-भंगिमाओं का सुंदर चित्रण खैंचा है शुरू से इस कहानी को फॉलो कर रा हूँ .. बहुत से उतार चडाव देखे हैं ... अंतिम कड़ी की प्रीक्षा रहेगी ...

रचना दीक्षित ने कहा…

बस मौन रह कर उस दर्द को महसूस करने की कोशिश करना चाहती हूँ

Dev ने कहा…

Wow...what a beautiful story...a gr8 feeling and u have been successful to express the deep felling...Regards

Lines Tell the Story of Life "Love Marriage Line in Palm"

रचना दीक्षित ने कहा…

क्या पूंछें?? न कुछ पूंछने को है न कुछ बताने को ही रह गया है बस जो बचा है वो इक दर्द है

गौतम राजरिशी ने कहा…

पूजा/तमन्ना की इस यात्रा में इब्तिदा से संग रहा और अचानक से ये आखिरी किश्त का ऐलान जैसे सोयी नींद से जगा गया है। मुझे लग रहा था कि अंत में सब ठीक ही हो जायेगा....लेकिन ये आखिरी कड़ी और ऊपर से संपादित। क्या कुछ बीती होगी आप पर, हम तो पढ़ कर एक छटांश भी भाँप न पाये होंगे।

दर्द की ये दास्तान शायद जाने कितने दिनों तक हांट करते रहे मुझे।

आप जहाँ भी हों मैम...क्या कहूँ...just wishing you all the best...may god give you all the strength