बुधवार, 15 दिसंबर 2010

दीपा 3

( गतांक: दीपाको समझ में आने से पहले वो परिणीता बन गयी! लड़के के बारे में किसी ने ख़ास खोज बीन की नही. पैसेवाला घर था,इसी में सब ख़ुश थे. वैसे भी लडकी के लक्षण ठीक नही थे !!अगर बाहर के लोग जान जाते तो और मुसीबत होती!

अजय बेहद निराश हो गया. लेकिन उम्र एक ही होने के कारण वह  नौकरी भी नही कर सकता था! उसकी तो पूरी पढ़ाई होनी थी! पर उसने आनेवाले सालों में दीपाका बेहद अच्छा साथ निभाया! उसे हमेशा महसूस कराया की उसकी जद्दोजहद में वो अकेली नही है. अब आगे पढ़ें....)


दीपा ज़िंदगी की कई ज़मीनी हक़ीक़तों   से अनजान थी. अट्ठारह साल की उम्र में वो ब्याहता हो गयी. हनीमून के लिए वो पति-पत्नी कश्मीर गए.उस के लिए कश्मीर घूमना ही बहुत बड़ी बात हो गयी. वैसे भी उसे घूमने  का शौक़ था. यही शौक़ उस के पती को भी था.

कश्मीर से लौटे तो दीपा को आगे की पढ़ाई करने की ससुरालवालों ने इजाज़त दे दी. लेकिन महाविद्यालय जाके नही,बाहर से.उसने इतिहास विषय ले लिया. उसे कत्थक नृत्य का शौक़ था. उस ने वो भी सीखना जारी रखा.

इन दिनों में उसे जिस एक बात का परिचय हो गया वो था पती का बेहद गुस्सैल मिज़ाज. कब किस बात पे बिगड़ जाये पताही नही चलता. सिर्फ इतना ही नही....उसका दीपा पे हाथ भी उठ जाता. ....और कई बार हाथ में गर कुछ चीज़ होती तो वो भी उसके शरीर पे पड़ जाती. दीपा सुन्दर थी. ये बात भी उस के पती को असुरक्षित महसूस करा देती. सांवली-सी दीपा के दाहिने गाल पे पढने वाला भंवर उस का सब से बड़ा आकर्षण था.....और उस के लम्बे ,घने बाल!

हम उम्र सहेलियाँ और पड़ोसनों से धीरे धीरे दीपा को समझ में आने लगा की उसका पती गे है. तब तक सम लैंगिकत्व  ये बात भी उसे पता नही थी. आगे चलके उसे एक लडकी और एक लड़का हुआ. लेकिन दीपा के शब्दों में शायद दो बार उस पे उसके पती ने बलात्कार कर दिया! पती को अपना न्यूनगंड खलता था और इस बात को छुपा के रखने की चाहत में वो दीपा पे बात बेबात बरस पड़ता. उस के ऐसा करना मर्दानगी थी....उस के इसी न्यूनगंड ने एक बार उससे बड़ी ही भयानक बात कर दी. कम से कम दीपा के पास" उस " घटना के स्पष्टीकरण के लिए और कोई पर्याय नही. उस घटना का विवरण मै दीपाके शब्दों  में देना चाहूँगी.

क्रमश:

12 टिप्‍पणियां:

Dr Varsha Singh ने कहा…

सुंदर कहानी के लिए साधुवाद! मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है!

चला बिहारी ब्लॉगर बनने ने कहा…

कथा का कथानक तो आपके हाथ से कभी छूटता ही नहीं और प्रवाह बनाए रखती हैं आप! किन्तु इस बार की कथा के आगे के अंश की प्रत्याशा से सहम जाता हूँ.. प्रतीक्षा में!!

Apanatva ने कहा…

maine aaj teeno ek sath pad liye......
agalee kadee ka intzar.......
aapke sampark me nayika aaee hai to sakaratmak ta kee umeed rakhe...?

वन्दना ने कहा…

कहानी प्रवाहमयी चल रही है अब आगे का इंतज़ार है।

ज्ञानचंद मर्मज्ञ ने कहा…

आखिर दीपा ने ऐसी क्या भयानक बात कह दी ..........
आगे जानने की उत्कंठा बढ़ गयी है !
-ज्ञानचंद मर्मज्ञ

रचना दीक्षित ने कहा…

वाह!!!!अच्छी चल रही है कहानी. सस्पेंस बना हुआ है.

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

पढ रही हूं हूं, आप लिखती चलें. टिप्पणी बाद में.

शारदा अरोरा ने कहा…

kitni sahajta se aise kathanak ko bhi aapne shabd diye hain ..

Basanta ने कहा…

Enjoying your stories again after long time. This one too, as usual, seems to be very interesting. I wil keep following it.

ali ने कहा…

कथा बढ़िया चल रही है पर आख़िरी पैरे के एक शब्द को लेकर कन्फ्यूज्ड हूं !

Harman ने कहा…

bahut badiya..

mere blog par bhi sawagat hai..
Lyrics Mantra
thankyou

M VERMA ने कहा…

त्रासद कथा. लगातार पढ रहा हूँ ...