शुक्रवार, 4 जनवरी 2013

इसे क्या कहेंगे ?

इस वक़्त एक टीवी .चैनेल  पे एक प्रोग्राम दिखाया जा रहा है।कौनसे शहर के लड़के लड़कियों को किस तरह छेड़ते हैं! मुझे हंसी आ गयी! मनमे सोचा,क्या सिर्फ लड़के? और सिर्फ लड़कियों को छेड़ते हैं?

एक बात जो मै  अपने पति से नहीं बता सकी यहाँ बताने जा रही हूँ।मेरी उम्र साठ  साल की है। मैंने सारी ज़िंदगी कुछ न कुछ तो काम किया लेकिन किसी एक जगह पे न रह पाने के कारन मुझे हर बार,पति के हर तबादले के साथ ,अपना काम छोड़ देना पड़ा। उनकी सेवा निवृत्ती का इंतज़ार करती रही,कि अपना कुछ काम शुरू कर सकूँ।इसलिए मुझे अपने कार्ड छपवाने ज़रूरी थे। मै किसी दफ्तर को तो अफ़ोर्ड नहीं कर सकती थी,सो मुझे अपनी इ-मेल ID तथा अपना कांटेक्ट नंबर  देना ज़रूरी था।

आप जान के दंग  रह जायेंगे कि 19 वर्षीय लड़के से लेके 65 साल के मर्दों ने मुझे कैसे कैसे परेशान  किया!एक दादाजी मेरे घर पहुँच गए।जब मैंने देखा कि जनाब काम की कोई बात नहीं कर रहे तो मैंने कहा कि मेरे पास अधिक समय नहीं है,मुझे बाहर  जाना है।मे  उठ खडी  हुई और उन्हें विदा किया।जनाब ने मुझे इ-मेल लिखी,कि क्या मै उन्हें अकेले में कभी नहीं मिल सकती ,और गर नहीं तो कमसे कम जब मै बाज़ार जाऊं तो उन्हें इत्तेला दूँ ताकि ये कहीं दूरसे मुझे घूर सकें!चलिए ,इन्हें हम कहेंगे कि ये सठिया गए हैं! 19/20 साल के लड़कों को क्या कहिये,जो मेरी उम्र जानते हैं?जानते हैं,कि , उनसे बड़े तो मेरे बच्चे हैं! गर उन्हें पलट के कहूँ,कि ,बेवकूफों! मेरी उम्र का तो लिहाज़ करो, तो जवाब मिलता है," तो क्या हुआ? आप दिखती तो 35 साल की हैं!"

मैंने अपनी जेठानी से एक बार ये बात( गलती से)कह दी तो वो कहने लगी," गलती तुम्हारी है। तुम्हें काम करने की क्या ज़रुरत आ पडी है?"
पति से कहूँ, तो वैसे ही घरमे क़ैद हूँ,किसी सखी सहेली का फोन भी अटेंड नहीं कर पाऊँगी ,इतनी बंदिशे लग जायेंगी!

दिन में न जाने कितनी ही बकवास इ-मेल डिलीट करती हूँ।गर मै  देखने में अच्छी लगती हूँ तो ये मुझे अपनी माँ से विरासत में मिला है।मेरी अपनी इसमें कोई कोशिश नहीं।आप सभी से पूछती हूँ,कि इन हालात में मैंने क्या करना चाहिए?अश्लील बकवास के लिए मे  इन जवान और बूढ़े दोनों को कटघरे में ला सकती हूँ,( इनके फोन नंबर और इ-मेल IDs ट्रेस हो सकते हैं)लेकिन इसके लिए मुझे अपने पति की मदद लेनी होगी। सब से पहले तो मुझे अपना काम बंद कर देने की सलाह मिलेगी अपने पति से! मैंने कभी ख्वाबों ख्यालों में सोचा नहीं था,कि ,इस उम्र में मुझे इन हालातों से रूबरू होना   होगा!

और येभी सुन लीजिये,की,इनमे से नब्बे प्रतिशत ये बात जानते हैं,कि मेरे पति पुलिस के एक आला अफसर रह चुके हैं!दिल तो करता है,कि हरेक की जम  के पिटाई हो,लेकिन कैसे? 

11 टिप्‍पणियां:

मैं और मेरा परिवेश ने कहा…

अफसोस होता है न जाने हमारा समाज किस दिशा में जा रहा है?

Ramakant Singh ने कहा…

एक सत्य जिसे उद्घाटित करने के हिम्मत चाहिए आपके बडेपन को प्रणाम

smt. Ajit Gupta ने कहा…

आप एक क्‍लास लेना शुरू कर दें, उसमें इन सबको बुला ले। दूसरे दिन ही ये सारे भाग जाएंगे। भोगवाद के चरम पर पहुंच गये हैं भारत के लोग।

रचना दीक्षित ने कहा…

दिल्ली की घटना के सार्थक पहलू यह आया कि लोग अब इस विषय पर बोलने को तैयार हुए है. जो आप सोचती रही है ऐसा तो मुझे ज्यादार महिलाओं के बारे में सच लगता है.

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

क्या कहा जा सकता है, वाकई.

Nilesh Kumar ने कहा…

smaazki soch bdle tab hi kuch ho skta hai

डॉ शिखा कौशिक ''नूतन '' ने कहा…

सार्थक प्रस्तुति . हार्दिक आभार हम हिंदी चिट्ठाकार हैं

rohitash kumar ने कहा…

सबसे पहले तो ये समझ नहीं आ रहा कि बुजुर्ग महोदय को क्या कहा जाए...लड़को की तो जमकर पिटाई होना चाहिए या उनके घरवालों को बताकर उनकी हालत ठीक की जा सकती है। पर बुजुर्गवार तो सिरे से लगता है कि सठिया गए हैं...अकेले हैं तो शादी कर लें फिर से...

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी ने कहा…

समझ में नहीं आता क्या कहूँ... आगे न जाने क्या होगा...सटीक आलेख...बहुत बहुत बधाई...

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

अधिकांश पुरुष नारी को अपने मनोविलास की वस्तु समझते हैं बराबरी का दर्जा कभी नहीं दे पाते .

आशा जोगळेकर ने कहा…

खाली दिमाग शैतान का घर । ऐसे सब लोगों को मजदूरी में लगा देना चााहिये ।