मंगलवार, 21 मई 2013

मेरी गलती कहाँ हुई?

बहुत लम्बे अरसे के बाद कुछ लिखने की हिम्मत जुटा  पाई हूँ। रोग हुआ है फैब्रो myalagia जो लाइलाज है. हर समय बेहद दर्द में रहती हूँ .खैर! ज़िदगी चल रही थी . मैंने इस दर्द को स्वीकार भी कर लिया था .

मेरी आर्किटेक्ट बेटी जो कुछ अरसे के लिए photographer  बन गयी थी,गारमेंट ऐक्सपोर्ट  करने लगी! उसका सारा कपड़ा मेरे यहाँ आता. उसे मै  धोती, सुखाती  और अपनी अलमारियों में रखती . फिर उसके दर्जी आते जिन्हें नाप के कपड़ा देना होता. सिले कपडे को कुरियर से भेजना होता .ना जाने और क्या,क्या करना पड़ता . आधा घर गोडाउन बन गया है. उसके कपडे के लिए मैंने ख़ास तौर पे अलमारियां खरीदी और बनवाईं भी . बिटियाकी  पीठ में दर्द होने के कारन हाथोहाथ बत्तीस   हज़ार के गद्दे बनवाये .मुझे खुशी हो रही थी कि उसका काम चल पडा है .

बदमिज़ाज तो वो होही गयी थी . ख़ास कर के मेरे और मेरी माँ के साथ. जिन दो महिलाओं ने उसे सब से अधिक प्यार दिया था .

मेरा दर्जी जो उसके कपड़े का हिसाब रखता,उसने मुझे कहा," मैडम ये जो कपडा पड़ा है ये उसके किसी इस्तेमाल का नहीं है. जगह घेर रहा है.तीन  साल पहलेके खरीदे कपडे में से बचा हुआ है. आप इसका इस्तेमाल कर लीजिए ."

मैंने कहा ," ठीक है…मुझे दो दोहड़ ठीक करने हैं . मै  यही कपड़ा ले लूँगी ."

मैंने वो दो दोहड़ ठीक किये. जनवरी में बेटी अपने काम के खातिर आ पहुँची . आतेही उसकी खानपान को लेके बदमिजाजी शुरू हो गयी मैंने उन बातों को नज़र अंदाज़ करना शुरू किया .आनेके दूसरे दिन   वो अचानक मेरे कमरे में आयी और मेरी दोहड़  पे उसकी नज़र पड़ी .

गुस्से में आके उसने मुझ से कहा," माँ! इस कपडे को इस्तमाल करनेसे पहले आपने मेरी इजाज़त लेना ज़रूरी नहीं समझा ?"
मैंने कहा," बेटे! मुझे लगा ये कपड़ा तेरी ज़रुरत का नहीं है!टेलर ने तो मुझे यही कहा!या तो मेरे से इसके पैसे लेले. "
बिटिया: " मुझे नहीं चाहियें पैसे! बात उसूलों  की होती है. मै चाहे इसका कुछ भी करती  …अपने  लिए ब्लाउज़ बना लेती"

मुझ पे मानो  पहाड़ टूट पडा …मेरी  वो बिटिया मुझे ऐसी बात कह रही थी  जिसके दो घर मैंने अपनी ओर से बसा दिए! पहले अमरीका में और दूसरा इंग्लैंड में!और ये सब उसके ब्याह के बाद! मुझे पता था कि  मै   उसके घर कभी जा पाऊँगी  लेकिन सोचती रहती थी कि उसका सजा सजाया घर कैसा दिखता  होगा! एक लकड़ी का सामान छोड़ मैंने हर एक चीज़ उसे भेजी थी! क्या कुछ नहीं दिया था उसे!परदे ,चद्दरें,रजाइयां ,भित्तिचित्र .....सैकड़ों चीज़ें!कुरियर द्वारा! लाखों का सामान मैंने बड़ी खुशी से भेजा  था . उसकी एक सहेली अमरीका में उसके घर गयी तो उसने मेरी बेटी से कहा,"ये घर तो तेरी माँ का लगता है!!!"
मेरी जो साड़ी  उसे पसंद आती मै  उसे कटवा के उसके लिए ड्रेस बनवा देती .उस बेटी ने मुझे ऐसी बात कह दी!
इतना कहके वो रुकी नही …आगे कहा," माँ पता है आपने मेरे साथ चीटिंग की है !"
उसका ये कहना मुझे लगा जैसे मैंने चोरी की है!उसके बाद उसने मुझे एक बेहद कटु ईमेल भेजी! मै  समझ नहीं पा रही हूँ कि  इतनी कडवाहट उसके मनमे मेरे लिए क्यों है?

इस घटना के बाद मै   शरीर और मन दोनों से टूट गयी . उसके कपडे की कीमत निकालो तो वो अधिक से अधिक पांच सौ रुपयों  का होगा! मै अपनी ही निगाहों में गिर गई !
इस घटना के बाद और बहुत कुछ हो गुज़रा ,लेकिन वो सब लिखने की हिम्मत जुटा  नहीं पा रही हूँ .
आप सभी से पूछती हूँ, मेरी कहाँ गलती हुई?इस शरीर और मन के दर्द  से मुझे कौनसा खुदा निजाद दिलवाएगा?ऐसा कौनसा जुर्म किया मैंने जो मेरी बेटी मुझे माफ़ नहीं कर सकती ?क्या ये वही बेटी है जिसके लिए मै तन मन और धन लुटाती रही? अपने ही परिवार से उसे बचाती रही?क्योंकि वो अनचाही कन्या थी?




38 टिप्‍पणियां:

शालिनी कौशिक ने कहा…

kshma ji aapse koi galti nahi hui ye to aapki beti hi badnseeb hai jo aap jaisee maa se aise pesh aa rahi hai .
aaj bahut dino bad aapse milna bahut sukhad raha .aapke bare me aksar sochti thi ki pata nahi aap kahan gayi aaj aapki tippani mili to yahan aana hua .aap khush raha kijiye aur jo bachche maa baap ko pyar aur samman nahi dete maa baap ko bhi unhen bhool jana chahiye.

Basanta ने कहा…

So sad that you are getting such rude treatment from your own daughter. Actually, she needed to be more careful of you than ever, as you are going through a serious health problem. I wish and hope she can understand you and love you.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज बुधवार (22-05-2013) कितनी कटुता लिखे .......हर तरफ बबाल ही बबाल --- बुधवारीय चर्चा -1252
में "मयंक का कोना"
पर भी है!
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

devendra gautam ने कहा…

आत्मकेंद्रीयता के दौर में संवेदनाएं मर गयी हैं. पाश्चात्य सभ्यता के संस्कार यही हैं.

shyam gupta ने कहा…

क्षमा जी...यूं तो यह कोई नहीं बता पाने का दावा कर सकता कि गलती कहाँ हुई सिवाय ईश्वर के काल के गति कौन जान पाया है... .इसीलिये तो ईश्वर है कि हमें आत्म संतुष्टि मिले कि हमने अपना कर्तव्य किया आगे जैसी ईश्वर की मर्जी........
----मेरे विचार से आपसे यही त्रुटि हुई कि आपने बेटी को अपनी क्षमता से अधिक देने का प्रयत्न किया, अत्यधिक प्यार के वशीभूत ..उसे स्वयं के पैरों पर खडा होने देना चाहिए था आत्म निर्भर बनने देना था चाहे कितनी भी कठिनाइयां आतीं...तभी बच्चे श्रम व कठिनाइयों का मूल्य समझते हैं .......

vandana gupta ने कहा…

शमा जी गलती आप से कोई नही हुयी ये तो वो बच्चे बहुत बदनसीब होते हैं जिनकी सोच इतनी खराब हो जाती है जो माँ होने का महत्त्व ही नही समझते …………और जब आपकी बेटी ऐसा कह रही थी तो आपको चाहिये था उसे अहसास करवा देतीं कि आप उसकी माँ हैं उसकी खरीदी गुलाम नहीं जो इतने वक्त से उसके बिज़नेस मे उसकी हैल्प करती रहीं वो भी तन मन और धन से बिना उससे कुछ लिये क्योंकि वो उसकी बेटी है सिर्फ़ इसलिये और किसी के लिये किया होता तो हर काम का मोल होता है …………क्या जरूरत है आप अपने आप को दुखी करें उसी वक्त मूँहतोड जवाब देना चाहिये था ऐसी बेटी को कम से कम उम्र भर याद तो रहता उसे ………कम से कम मैं तो ऐसी ही माँ हूँ यदि मेरी बेटी इस तरह करे तो ऐसा जवाब दूँ कि या उम्र भर संबंध रखे या हमेशा के लिये तोड दे मगर उसकी गलती जरूर बताऊँ । आप अपनी सेहत का ख्याल रखिये और उसके काम मे कोई सहयोग मत करिये शायद तब अहसास हो उसे वरना ऐसे बच्चों से क्या संबंध रखना जो इतने मतलबी हों या जिनके लिये माँ का कोई महत्त्व ही ना हो

smt. Ajit Gupta ने कहा…

क्षमाजी आप लिखिए, लेखन ही आपके रोग का इलाज है। जिन्‍दगी में कुछ दर्द ऐसे होते हैं जिनको कहा नहीं जाता लेकिन कह देने से या लिख देने से दर्द कम होने लगता है।

shahroz ने कहा…

AAp ki is post ko padhte huye....kroor hote samay ki bhayavahta aur teeksh hui...ham pata nahin kahaan ja rahe hain...Rishton ki paasdaari bhi khatm hoti ja rahi hai..behad afsos hua, jab ek stri hi mamatv ko na samajh paaye.samay kividambna hai! aap kahin bhi galat nahin. Bitiya kabhi khud aapse muaafi maangegi!

मनोज कुमार ने कहा…

आज के दौर में हम इतने संवेदनहीन होते जा रहे हैं कि यह प्रश्न बार-बार मन में कौंध ही जाता है कि हमसे ग़लती कहां हुई?

रश्मि शर्मा ने कहा…

आप परेशान न हों....ये वक्‍त ही खुदगर्जी का है। लोग रि‍श्‍तों की कीमत लगाते हैं...पहचानते नहीं। आप इसे साधारण घटना की तरह भूल जाइए और लि‍खना जारी रखें। शुभकामना...

Reena Pant ने कहा…

शमाजी,आपकी कही कोई गलती नहीं हुई।आपको जो अच्छा और ठीक लगा ,आपने किया.आपकी बेटी की सोच जहाँ तक पहुची,जो उसे ठीक लगा उसने किया ......कभी- कभी कुछ चीजों को समय पर छोड़ देना चाहिए।क्यूंकि वही घाव भी देता है और दवा भी।आप तो बस जो दिल में आये वो लिख दिया कीजिये।दिल हल्का होगा।माफ़ कीजियेगा उम्र में छोटी हूँ सलाह देने का अधिकार नहीं, निवेदन है

kavita verma ने कहा…

man ka dard shareer ke dard se jyada teesata hai ..kshama ji aap lekhan me apna dhyan lagaaiye ..samy har marz ki dawa hai ..

Suman ने कहा…

क्षमा जी आभार मेरे ब्लॉग पर आने के लिए
लिखते रहिये अपने दुःख दूर करने का यही एक उपाय है !

abhi ने कहा…

oh...behad dukh hua kshama ji ye sun kar...aapki kahan koi galti hai isme...
main samajh sakta hun aap jo mahsus kar rahi hongi abhi..
aap itne dino se nahi nazar aa rahi thi mujhe laga tha ki shayad aap aaram kar rahi hain...lekin ye to pata hi nahi tha..
khair,
apna khyal rakhiye aap aur likhte rahiye, likhne se man halka to hota hi hai!!

शारदा अरोरा ने कहा…


क्षमा जी ..आपको दुबारा ब्लॉग पर देख कर बहुत प्रसन्नता हुई ...आपनी तबियत का ध्यान रखें ..बेटी के रवय्ये को जान कर बुरा तो लगा ...मगर यूँ टकरा टकरा के मिट जाना अपनी नियति नहीं ....ये सारे तो इम्तिहान हैं ...कितना स्टेबल रह पाते है ..आगे बढिए ..हमारी शुभकामनायें हैं ..

शारदा अरोरा ने कहा…


क्षमा जी ..आपको दुबारा ब्लॉग पर देख कर बहुत प्रसन्नता हुई ...आपनी तबियत का ध्यान रखें ..बेटी के रवय्ये को जान कर बुरा तो लगा ...मगर यूँ टकरा टकरा के मिट जाना अपनी नियति नहीं ....ये सारे तो इम्तिहान हैं ...कितना स्टेबल रह पाते है ..आगे बढिए ..हमारी शुभकामनायें हैं ..

संध्या शर्मा ने कहा…

वक़्त हर जख्म को भर देता है... अपने दर्द को शब्दों में ढालिए. आप तो क्षमा हैं और अपनी ही बेटी को क्षमा करने में देर कैसी ? जिद माँ से ही की जाती है न, कितनी भी बड़ी क्यों न हो रहेगी तो आपकी वही बिटिया ही न. माफ़ कर दीजिये. उन्हें एक दिन जरुर अपनी गलती का अहसास होगा... लिखना जारी रखिये... शुभकामनायें

अली सैयद ने कहा…

अपनी सेहत का ख्याल रखिये ! बिटिया रवैय्ये के बारे में पढ़कर बहुत बुरा लगा !

मीनाक्षी ने कहा…

शमाजी..पहले तो स्वागत है ब्लॉग़जगत में फिर से लौटने के लिए..लेखन और दोस्तों के साथ वक्त बिताइए. (आभासी या असल ज़िन्दगी के) आपका दर्द ऐसा है कि ज़रा सा तनाव भी उस दर्द को चार गुना और बढ़ा देता है...
बेटी की बात करें तो श्याम गुप्ताजी की टिप्पणी पर ज़रूर गौर करिएगा...आसानी से मिले साधन हों या परिवार के करीबी लोग हों सभी को फॉर ग्राटेड लिया जाना स्वाभाविक है...
अब आप सिर्फ और सिर्फ अपने ऊपर ध्यान दें...कभी कभी चुप की सज़ा ज़्यादा ज़ोरदार चोट करती है...

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी ने कहा…

लाजवाब...बहुत बहुत बधाई...

Kunwar Kusumesh ने कहा…

बच्चे जब बड़े हो जाते हैं तो उन्हें भी तमाम टेंशन रहते हैं।बेटी की कही बात को दिल से न लगाइये।
अपनी सेहत का ख्याल रखिये और दवा खाती रहिये।

रश्मि प्रभा... ने कहा…

आप लोगों से पूछ रही हैं ? आपके स्नेह का उत्तर लोग नहीं दे सकते,जब आपकी बेटी ने नहीं दिया ................ अपनी ईमानदारी, अपनी सच्चाई,अपने प्यार पर खुद फख्र कीजिये, क्योंकि आपने माँ' का कर्तव्य निभाया। दुःख कम नहीं होता,पर अपना ऐतबार सबकुछ सह जाने की ताकत देता है

मैं और मेरा परिवेश ने कहा…

आपकी पीड़ा का अनुभव हम सब कर रहे हैं। मैं अगर मुंबई में होता तो जरूर आपके सानिध्य का लाभ लेता। आप इतनी अच्छी हैं इसलिए ही भगवान ने आपको कष्ट दिया क्योंकि कष्ट सहने की हिम्मत भगवान अच्छे लोगों को ही देता है। क्राइस्ट ने कितना दुख सहा। आपको कभी देखा नहीं, आपसे कभी मिला नहीं लेकिन आपसे एक अपनेपन का रिश्ता है ऐसा लगता है और इसी से जान पाया कि आपके भीतर कितनी संवेदनशीलता है। ईश्वर जरूर आपको स्वस्थ करेंगे और आप जल्द ही बेहतर महसूस करेंगी।

सतीश सक्सेना ने कहा…

आपकी बेटी बदनसीब है और फल यही समाज उसे देगा ...
आप अपना इलाज़ होमियोपैथी में जरूर करवाएं ...अगर डॉ ठीक मिला तो अवश्य ठीक हो जायेंगी !

बेटी को भुला दें तो अच्छा होगा !

jyoti khare ने कहा…

आदरणीया,आपका स्वागत है
जब संवेदना मरने लगती है तो रिश्तों में जान कहाँ होती है
सब रिश्ते बेजान हो जाते हैं----
बेजान रिश्तों के बारे में क्या सोचना
मन की गहन अनकही अनुभूति को आपने व्यक्त किया है
सादर


आग्रह है मेरे ब्लॉग का अनुसरण करें
ओ मेरी सुबह--
http://jyoti-khare.blogspot.in

Rajendra Kumar ने कहा…

जिन्‍दगी में कुछ दर्द ऐसे होते हैं जिनको कहा नहीं जाता लेकिन साझा करदेने से दर्द कम होने लगता है।जिंदगी संघर्ष का ही नाम है.

Onkar ने कहा…

लगता है, आप की कहानी सब की कहानी है. प्रभावी प्रस्तुति

Vikesh Badola ने कहा…

ऐसी अनचाही बातों का जवाब ढूंढने निकलेंगे तो बहुत बातें, गलतियां आपस में गुत्‍थमगुत्‍था हुईं मिलेंगी। कसूर आपका नहीं जमाने का है।

रचना दीक्षित ने कहा…

क्षमा जी बहुत बहुत स्वागत फिर एक बार ब्लॉग पर आने के लिये. ईश्वर आपको लंबी आयु दे और दर्द सहन करने की अनोखी क्षमता भी.

आजकल इस तरह का व्यवहार इतना अस्वाभाविक भी नहीं. रिश्ते अब समाप्तप्राय ही होते जा रहे हैं. हाँ दुःख जरुर होता है रिश्तों के टूटने का.

मार्मिक.

आशा बिष्ट ने कहा…

क्या ये सच है??
अगर सच है तो भुला दीजिये बेटी ही है हर जगह आपसे कई पीछे ...इस तरह ऐसा लिखकर यकीन मानिए अच्छा नही लगा मुझे...!

आशा बिष्ट ने कहा…

अच्छे स्वास्थ्य की अनेकानेक शुभकामनाएं।।

राजेश सिंह ने कहा…

सचमुच दुखद पढ़ कर क्रोध भी हुआ मन खिन्न हो गया क्या इसी दिन के लिए .................

tejkumar suman ने कहा…

swagat, kshamajee. Aapke apne baare men vyakt kiye gaye vicharon ko padhkar atyant dukhad laga. Aap swsth rahen yehi shubhkamana hai.

Ajay Jha ने कहा…

kshma ji bhut dino baad aapke post mile. ye jindgi na bhut drd deti hai jo srir ke drd se khi jyada hoti hai. fir bhi ise shna hota hai, jo aap sh rhi hain, uski bdnsibi ki to kamna nhi krunga, kyuki wo beti hai, haa dua krunga aapke liye.

Kailash Sharma ने कहा…

बहुत दुःख हुआ यह सब पढ़ कर...बेटी जो माँ बाप के सब से करीब होती है, उसका यह व्यवहार निश्चय ही दुःख देता है. लेकिन आज सभी बच्चे आत्मकेंद्रित होते जा रहे हैं, और भूल रहे हैं कि उनका व्यवहार उन्हें एक निस्वार्थ प्रेम से मरहूम कर रहा है..सब कुछ भूल कर अपने स्वास्थ का ध्यान दें. संतान के व्यवहार का दंश आज अधिकांश माता पिता सह रहे हैं, बस अपने को व्यस्त रख कर सब कुछ भूलने की कोशिश करें, यद्यपि भुक्तभोगी होने के कारण जानता हूँ कि यह इतना आसान नहीं होता. आपके स्वास्थ के लिए शुभकामनायें!

सतीश सक्सेना ने कहा…

अगर होमियोपैथी में भरोसा हो तो मुझे अपनी समस्या बताएं ..
मंगलकामनाएं आपको

Mahi S ने कहा…

खुद पर फर्ख़ कीजिए... अल्‍लाह आपकी जिंदगी में सब ठीक करे...

Mahi S ने कहा…

खुद पर फर्ख़ कीजिए... अल्‍लाह आपकी जिंदगी में सब ठीक करे...