शनिवार, 12 सितंबर 2009

बिखरे सितारे १३) सितारों से आगे.....!

( पूजाकी ज़िंदगी पे उड़ एक चली गोली के दूरगामी असर हुए: अब आगे पढ़ें।)

जिस बच्चे को गोली लगी उसका क्या हुआ? उसे जाँघ पे गोली लगी। दादा जी ने निशाने बाज़ी में सिखा रखा था,वो काम आ गया...वरना लड़का जानसे जाता... पूजाके दादा जी ने उसे सही वक़्त पे अस्पताल पहुँचाया। वो बच गया। लेकिन उसके बापने सारी उम्र पूजाके परिवार को black मेल किया। हालाँकि,क़ानूनन ऐसी कोई ज़िम्मेदारी नही बनती थी, लेकिन वो १२ बच्चों का परिवार था। बाप तो शराबी थाही..पूजाके परिवार ने बरसों उन्हें साल भरका अनाज, दूध कपड़े आदि दिए। तीज त्यौहार पे पैसे भी देते रहे। चंद सालों बाद वो निकम्मा लड़का एक सड़क हादसे का शिकार होके मारा भी गया। परिवार मे से किसी बच्चे को काम करना ही नही होता...ये भी एक अजूबा था...!

एक बार लड़केका बाप उस लड़के को लेके, पूजाके तथा परिवार के फॅमिली डॉक्टर के पास पहुँचा। शिकायत ये कि, जबसे गोली लगी, लड़के को एक कान से सुनायी देना कम हो गया...! तबतक तो हादसे को छ: साल बीत चुके थे। डॉक्टर की शहर में बेहद इज्ज़त थी..गरीबों के डॉक्टर कहलाते थे।

इन डॉक्टर ने उस लड़के के गाल पे एक थप्पड़ लगाई और कहा," अब दूसरे कान को बहरा कर दिया मैंने...भाग जा..!"

खैर! पूजाके जीवन पे लौट चलती हूँ। पूजा छुट्टीयों में घर आने से पूर्व , दादा जी ने उस IAS के लड़के को एक पारिवारिक तस्वीरों का अल्बम दिखाया और,पूजाकी मंगनी की तस्वीरें भी दिखा दीं।

पूजा अन्यमनस्क स्थिती में छात्रावास से अपने घर पहुँची । अपनी मंगनी को लेके ज़्यादा समय वो अपने मंगेतर के परिवार को अंधेरे में नही रखना चाह रही थी। वैसे एक बात उसने मंगनी के पूर्व साफ़ कर दी थी...गर मंगनी और ब्याह के दौरान उसे एहसास हो की, क़दम सही नही है तो वो मंगनी तोड़ भी सकता है। मंगेतर की माँ, पूजाकी माँ की बचपन की सहेली थी। लड़का रईस घरका होनेके अलावा , commercial पायलट भी था। घरका अछा खासा व्यापार था। दिखने में काफ़ी अच्छा था। कई परिवार उस लड़के के लिए रुके थे। लेकिन विधिलिखित घटना होता है,तो, घटके रहता है।

पूजाने अपने परिवार को विश्वास में ले के मंगनी तोड़ दी। लड़के की माँ का दिल टूट गया। इस बहू को लेके बड़े सपने बुने थे। पूजा थी भी सरल स्वाभाव की और साफ़ मनकी। माँ, मासूमा ने भी, एक अलग से चिट्ठी लिख दी। पूजा के मनसे एक बोझ तो उतरा।

एक दिन पूजा के साथ उसके परिवारवाले उस डेप्युटी कलेक्टर के घर गए। पूजा पे जैसे जादू चल गया। एक दर्द से छूटी तो और एक दर्द सामने आ खड़ा हुआ...

लड़के की बातचीत परसे पता चल रहा था की, उसका परिवार काफ़ी पुराने ख़यालात का है....अपनी माँ की वो हमेशा तारीफ़ करता...उनके अन्य लोगों को लेके सख्त मिज़ाज की बातें भी करता, लेकिन काफ़ी इतराके, अभिमान पूर्वक करता।

पूजा को उससे मिले २ माह भी नही हुए थे,कि, उसका तबादला मध्यवर्ती सरकार में हो गया। अन्न तथा कृषी मंत्रालय में...उसे देहली जाना था...पूजा के दादा का केस तो अबतक अटका ही था,लेकिन लड़के ने अधिकतर काम कर दिया था।

जैसे ही उस लड़के की तबादले की बात सुनी, पूजा टूट-सी गयी...माँ, मासूमा ने अपनी बेटी की मन की बात भाँप ली थी ..पूजा अपने आपको ना जाने कितने कामों में लगाये रखने लगी...एक दिन माँ ने उससे कहा....और जो कहा,वो एक अलग कहानी बन गयी....उस हादसे से आगे चलती हुई....

क्रमश:

पूजा के परिवार की कुछ अन्य तस्वीरों के लिए रुकी हूँ..

25 टिप्‍पणियां:

raj ने कहा…

एक दर्द से छूटी तो और एक दर्द सामने आ खड़ा हुआ.......hum bhi aage ka janne or tasveere dekhne ke liye ruke hai..khani ka happy end kijiyga.....

BrijmohanShrivastava ने कहा…

एक अंजना मोड़ और सितारों से आगे भाग १२ व १३ एक साथ पढ़े ,भाग १२ थोडा बड़ा लगा ,पूजा के भविष्य वाबत उत्सुकता बड़ी है ,बगैर लायसेंस बाली बन्दूक का केस तो खैर निवत ही जायेगा |पहली बार मालूम हुआ के बन्दूक में १३ गोलियां होती हैं अभी तक मैं भी १२ ही समझता रहा था क्योंकि उसका नाम ही ट्वेलबोर कहा जाता है खैर ,कहानी ,/उपन्यास की रोचकता बढ़ती जा रही है इधर मध्यप्रदेश में आई ए एस और डिप्टी कलेक्टर में अंतर होता है यहाँ डिप्टी कलेक्टर की परीक्षा पी एस सी कंडक्ट करता है |

Bhagyashree ने कहा…

getting more and more intrigued, kshama; everyday i check to see if there is an update

kshama ने कहा…

जब IAS के अफसर,( कलेक्टर के under training होते हैं) , उतने दिन Dy. कलेक्टर( या कहीं,कहीं अस्सिटेंट) कहलाते हैं। ये अवधि केवल कुछ माह का होता है ...उसके बाद कलेक्टर ही कहलाते हैं ...जो All India Services में IPS के अफसर भी होते हैं, वो भी ASP( assitent SP ) कहलाते हैं।

हाँ, १२ वा भाग अधिक बड़ा हो गया,क्योंकि, एक सिलसिला बनाये रखना था...इसलिए १३ वाँ भाग छोटा रहा। आप अच्छे सुझाव देते हैं...शुक्र गुज़ार हूँ!

kshama ने कहा…

एक और स्पष्टीकरण ...ये twelve bore बन्दूक़ नही थी ...ये German बनावट की automatic rifle थी . गर उसमे 13 गोलियाँ होती ,तो एक trigger में 13 चल गयीं होतीं ! पूजाके दादा को भी ये बात नही पता थी,की, १३ गोलियां हैं...राइफल automatic थी ये तो पता था...!

महफूज़ अली ने कहा…

aaapke yeh sansmaran mujhe baandh dete hain............ aur jab kramash dekhta hoon..... to ek lalak si rah jaati hai......


ki ab aage kya.....???????

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

पूजा का धारावाहिक बढ़िया चल रहा है।
बधाई!

Mumukshh Ki Rachanain ने कहा…

लेकिन विधिलिखित घटना होता है,तो, घटके रहता है।

काटी कहा आपने.
कहानी के अंत में यह पढ़ कर "...एक दिन माँ ने उससे कहा....और जो कहा,वो एक अलग कहानी बन गयी....'
उस नै कहानी में भी रोचकता बढ़ गई.

अगली कड़ी का इंतजार.
चन्द्र मोहन गुप्त
जयपुर
www.cmgupta.blogspot.com

ललितमोहन त्रिवेदी ने कहा…

कहानी रोचक मोड़ लेती जा रही है क्षमा जी ! माँ ने जो कहा वह अलग कहानी भी कह डालियेगा ,रोचकता और बढ़ जायेगी !
इंतजार रहेगा !

संदीप शर्मा ने कहा…
इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.
'अदा' ने कहा…

pathakon ko baandhane ki kala khoob aati hai aapki lekhni ko..
jaari rahein..

दिगम्बर नासवा ने कहा…

पूजा की कहानी दिलचस्प होती जा रही है ........ उसकी आकाक्षा उसकी ख़ुशी उसकी उदासी ......... रोचक मोड़ ले रही है कहानी ......

Vivek Rastogi ने कहा…

अगली कड़ी का इंतजार है...

शरद कोकास ने कहा…

बीच बीच से पढ़ रहा हूँ इसलिये जुड़ नही पा रहा । लेकिन एक दिन फुर्सत से पूरा पढूंगा .. हाँ आपकी भाषा और कथा के शिल्प में कुछ बात तो है .. बधाई ।- शरद कोकास

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी ने कहा…

भावों की सुन्दर प्रस्तुति...बहुत बहुत बधाई...मैनें अपने सभी ब्लागों जैसे ‘मेरी ग़ज़ल’,‘मेरे गीत’ और ‘रोमांटिक रचनाएं’ को एक ही ब्लाग "मेरी ग़ज़लें,मेरे गीत/प्रसन्नवदन चतुर्वेदी"में पिरो दिया है।
आप का स्वागत है...

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी ने कहा…

अच्छी प्रस्तुति....बहुत बहुत बधाई...
मैनें अपने सभी ब्लागों जैसे ‘मेरी ग़ज़ल’,‘मेरे गीत’ और ‘रोमांटिक रचनाएं’ को एक ही ब्लाग "मेरी ग़ज़लें,मेरे गीत/प्रसन्नवदन चतुर्वेदी"में पिरो दिया है।
आप का स्वागत है...

ओम आर्य ने कहा…

रोचकता बढ गयी है ........इंतजार रहेगा अगले अंक का.......सुन्दर!

ज्योति सिंह ने कहा…

do baar aakar laut gayi itni badhiya rachana ko padhkar tippani na dene ka afsos ho raha tha par aaj safalata milne par khushi hui .pooja ki kahani dil ko chhune wali avam rochak banti jaa rahi hai .aage padhne phir aaungi .ek mahine bahar rahi teen din pahle aai is wazah se der ho gayi aane me .

कोपल कोकास ने कहा…

नम्स्ते आंटी आपने सितारो पर बहुत अच्छा लिखा है सितारे और तारे किसे पसंद नही होते तारो की जगमगहट बहुत ही सुदंर लगती है आंटी मैने अभी अपने बोल्ग पर रमज़ान पर लिखा है देखियेगा ज़रुर ।

mark rai ने कहा…

bahut hi achcha kshamaa ji....kaphi interesting lag raha hai.....aapka dharawahik...

mark rai ने कहा…

एक दर्द से छूटी तो और एक दर्द सामने आ खड़ा हुआ.......is line ne to mujhe jhkjhor kar rakh diya......

सुरेन्द्र "मुल्हिद" ने कहा…

another amazing part...
waiting for the next one ji...

आदित्य आफ़ताब "इश्क़" ने कहा…

kahani bahut aage jaa chuki hain main ..............saari kishten padh raha hun .................dheere-dheere ...................

BrijmohanShrivastava ने कहा…

भाग १४ या १४ वीं कड़ी का बेसब्री से इंतज़ार है

गौतम राजरिशी ने कहा…

डाक्टर के उस थप्पड़ मारने वाले एपिसोड ने खूब हँसाया...
पूजा के इस नये इश्क की भूमिका का पूर्वानुमान तो उसी वक्त हो चला था जब इस IAS लड़के की एंट्री हुई थी...

रोचकता बरकरार है। शिल्प मँजा हुआ है...