शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2010

बिखरे सितारे:7 मझधार में

.(पूर्व  भाग :उस रात नींद में न जाने वो कितनी बार डरके रोते हुए उठी...लेकिन मासूम का प्यार देखो...सुबह अपने पितापे दृष्टी पड़तेही खिल उठी..पूजा की आँखों से   चुपचाप नीर बहा..हर गुज़रता दिन न जाने कितनी चुनौतियाँ भरा होता!
सास अक्सर मिलने जुलने वालों से कहती." अरी बड़ी चीवट जात है..पहले दो लड्कोंको  खा गयी..इसे जो पैदा होना था..कुलक्षनी है.."
इस मासूम जान की ज़िम्मेदारी अब केवल पूजाकी थी..बीमारी, दवा  दारू, हर चीज़ में अडंगा खड़ा हो जाता..इतनीसी बीमारी के लिए कोई डॉक्टर के जाता है?)

पूजा की बिटिया कुछ ९ माह की थी तबकी ये बात है. गौरव को किसी कामसे बंगलौर के बाहर जाना था. पूजाकी सास का मन हुआ बेटे के साथ जानेका. तो फिर पूजा और बिटिया का ( केतकी) जाना भी तय हो गया...वजह? गर उन्हें पीछे छोड़ा तो लोग क्या कहेंगे?

भरी गरमी का मौसम था...रास्तेमे बिटिया को पानी पिलाने के लिए पूजाने कई मिन्नतें की लेकिन ,सासू माँ  और गौरव का एकही उत्तर: " ये क्या बिना पानी के मर जायेगी?"
बच्ची केतकी को पता नही क्यों बोतल से चिढ थी. वो छोटी-सी लुटिया से ही पानी या अन्य पेय पीती थी. इस कारण गाडी का रोकना ज़रूरी था, लेकिन उसकी कौन सुनता?

तकरीबन ५ घंटों के सफ़र के बाद वो लोग किसी अन्य अफसर के   घर भोजन के लिए रुके. उनकी पत्नी डॉक्टर थी. पूजा का सर दर्द से बुरा हाल हो रहा था..उसे उल्टियाँ  भी हो रही थी. भोजन के तुरंत बाद आगे का सफ़र करने जैसी उसकी हालत नही थी. गौरव और सासू माँ, दोनों का मूड ख़राब हो गया...मित्र ने एक गेस्ट हाउस बुक करा दिया..पूजा ने कुछ देर के लिए बच्ची को सास के हवाले किया और सासुमा को दहलीज़ ठोकर लगी...बच्ची जोर से ज़मीन पे जा गिरी...! ये हादसा तो किसी से भी हो सकता था..पूजा को कोई शिकायत नही थी...लेकिन कुछ देरमे बच्ची कोभी उल्टियाँ शुरू हो गयीं..४/५ बार हो चुकी तो पूजा ने गौरव से किसी बाल रोग विशेषग्य  को  बुलाने की इल्तिजा की...फिर वही जवाब:" तुम इतनी-सी बात पे चिंतित हो जाती हो..सुबह तक अपने आप ठीक हो जायेगी.."

लेकिन रात ९ बजने तक बच्ची को तकरीबन १० बार उल्टी हो चुकी..पूजा की अपनी हालत ठीक न थी,वो बच्ची को किसी तरह संभाल रही थी..अंत में उसने गौरव को बिना बताये गौरव के मित्र की पत्नी को फोन किया तथा, स्थिती बतायी..उसने तुरंत डॉक्टर का इंतज़ाम किया.

जब डॉक्टर गेस्ट हाउस  पहुँचा तो गौरव को बेहद गुस्सा आया  ! उसे बिना कहे डॉक्टर बुलाने की पूजाकी हिम्मत कैसे हुई..? डॉक्टर ने बी केतकी की चिकित्चा करते हुए पूजा को कई सवाल पूछे,उनमे से एक था," क्या बच्ची कहीँ   गिरी थी?"
पूजा ने साधारण से ढंग से  बता दिया की,वो दोपहर में  गिरी थी.

डॉक्टर गेस्ट हाउस से निकला और सासू माँ ने दहाड़े मार के रोना शुरू कर दिया...! कहने लगी, " मै तो अब इस बच्ची को कभी गोद में नही लेने वाली..बहू का तो मुझपे विश्वास ही नही..मर मारा जाती तो मेरे सर इलज़ाम मढ़ा जाता.."
गौरव तथा अपनी सास से पूजा ने कई बार कहा,की, उसके मनमे ऐसा वैसा कुछ नही था...डॉक्टर ने पूछा तब उसने बताया...और ये की, ऐसे तो वो किसी के भी हाथ से गिर सकती थी..लेकिन नही...कोई नही माना..गौरव उन दोनों को छोड़ माँ के कमरेमे सोने चला गया..

सुबह तक पूजा नही संभल पाई... केतकी कुछ बेहतर थी..पूजाने लाख कहा: " आप दोनों निकल जाएँ...मै कल परसों बिटिया को लेके ट्रेन से बंगलौर लौट जाउँगी..."
लेकिन जनरीती की दुहाई देते हुए सब वापस लौट गए. पूजा और बिटिया से दोनों ने बात चीत करनी बंद कर दी...
इसके कुछ ही दिनों बाद एक ऐसी घटना घटी, जब केतकी मौत के मूह से लौट आयी...

क्रमश:

19 टिप्‍पणियां:

बूझो तो जानें ने कहा…

Kahani rochakta ke saath aage bar rahi hai.
Ab tho agli kadi aur ek naye ghatna ,jo ghota use padne ka intezaar rahega.
Dhanyawaad.

विनोद कुमार पांडेय ने कहा…

एक औरत की कहानी जो अपने ही घर में अपने बच्चों के लिए अपने पति और माँ जैसी सास से एक खामोश लड़ाई लड़ रही है.....बहुत ही मार्मिक कहानी कई सामाजिक पहलुओं पर प्रहार करती हुई....हमें बहुत अच्छी लगी आगे की कड़ी का इंतज़ार है...धन्यवाद क्षमा जी.....और साथ ही साथ शिवरात्रि की हार्दिक बधाई!!

Bhagyashree ने कहा…

bezabri se intezaar agli kisht ka

सुरेन्द्र "मुल्हिद" ने कहा…

follow karta aa raha hoon...

acha laga ye bhaag!

रवि कुमार, रावतभाटा ने कहा…

बेहतर...
प्रस्तुति का बढ़ना...

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

कहानी तो दिन-प्रतिदिन मार्मिक होती जा रही है..

Babli ने कहा…

महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें!
बहुत बढ़िया लगा ! बधाई!

दीपक 'मशाल' ने कहा…

duaa karoonga ye aap-beeti kisi pe na beete..

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

मार्मिक संस्मरण!
महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनायें!

दिगम्बर नासवा ने कहा…

मार्मिक .... कहानी में दर्द बढ़ता जा रहा है ....

डिम्पल ने कहा…

dil dard se bhar jata hai padh ke...puja ki aapbheeti..

Basanta ने कहा…

So sad! This Gaurav and his mother are not human----

गौतम राजरिशी ने कहा…

उफ़्फ़्फ़...कभी इन जाहिलों की क्रुरता पर क्रोध आता है तो कभी तमन्ना की निरिहता पर गुस्सा।

Ravi Rajbhar ने कहा…

Kahani bahut dard samete huwe hai..
aap bahut achchha likhtin hai...badhai.

संहिता ने कहा…

agla bhaag kab post karengi?
intezar rahega.
utsukata bani hui hai.

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

कोई कैसे इतना क्रूर हो सकता है । और कोई इतना निरीह इतना बेबस ।

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

बहुत बढ़िया प्रस्तुति .... फोटो भी बढ़िया हैं ... रंग उत्सव की शुभकामनाये ....

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

बहुत बढ़िया प्रस्तुति, रंग उत्सव होली की शुभकामनाये ....

Raaaj ने कहा…

स्वागत के लिए बहुत बहुत धन्यवाद्. कृपया अपने विचारो से अवगत करवाते रहे.

राज