शुक्रवार, 12 जुलाई 2013

क़ीमती तोहफ़ा

                                                                                                      
बरसों साल पूर्व की बात है. हम लोग उन दिनों मुंबई मे रहते थे. मेरी बिटिया तीन वर्ष की थी. स्कूल बस से स्कूल जाती थी. एक दिन स्कूल से मुझे फोन आया कि बस गलती से उसे पीछे छोड़ निकल गयी है. मै तुरंत स्कूल पहुँची. बच्ची को  स्कूल के दफ्तर  मे बिठाया गया था. मैंने देखा, उसके एक गाल पे एक आँसू आके ठहरा हुआ था. मैंने अपनी उंगली से उसे धीरे से पोंछ डाला. तब बिटिया बोली," माँ! मुझे लगा तुम नही आओगी,इसलिए ये पानी पता नही कहाँ से यहाँ पे आ गया!"    मैंने उसे गले से लगा के चूम लिया.

अब इसी तसवीर की दूसरी बाज़ू याद आ रही है. उस समय हम नागपूर मे थे. बिटिया वास्तु शाश्त्र की पदव्युत्तर पढ़ाई के लिए अमरीका जाने वाली थी. मै बड़ी दुखी थी. मेरी चिड़िया के पँख निकल आए थे. वो खुले आसमाँ मे उड़ने वाली थी और मै उसे अपने पँखों मे समेटना चाह रही थी.  छुप छुप के रोया करती थी.

फिर वो दिन भी आया जिस दिन हम मुंबई के  आंतर राष्ट्रीय हवाई अड्डे पे उससे बिदा लेने खड़े थे. उस समय बिटिया को बिछोह का कोई दुःख नही था. आँखों मे भविष्य के उज्वल , थे. आँसूं तो मेरी आँखों से बहना चाह रहे थे. मै अपनी बिटिया से बस एक आसूँ चाह रही थी. ऐसा एक आँसूं जो मुझे आश्वस्त करता कि बिटिया को मुझ से बिछड़ने का दुःख है.  अब मुझे बरसों पहले उस के गाल पे ठहरे उस एक आँसूं की कीमत महसूस हुई. काश! उस आसूँ को मै मोती बनाके एक डिबिया मे रख पाती! कितना अनमोल तोहफा था वो एक माँ के लिए!   जब बिटिया कुछ साल बाद ब्याह करके फिर अमरीका चली गयी तब भी मै उसी एक आँसूं के लिए तरसती रही,लेकिन वो मेरे नसीब न हुआ!

और अब कुछ की महीनों पूर्वकी बात है वो मुझे फिर एकबार रोता हुआ छोड़ गई . अब मेरे से संपर्क तक रखनेमे उसे कोई दिलचस्पी नही .

क़ीमती तोहफ़ा

9 टिप्‍पणियां:

anshumala ने कहा…

क्षमा जी
माफ़ कीजियेगा , ये कहानी है या आप की निजी बात मुझे समझ नहीं आया । एक बार हम समय से बस स्टाप नहीं पहुंचे हमारी बेटी वापस स्कुल चली गई , मै बड़ी मुश्ल्किल से स्कुल पहुंची और वहा जा कर मै खुद ही रोने लगी ये सोच कर की वो डर गई होगी परेशांन होगी जबकि वो बिलकुल ही शांत थी :) मै खुद बहुत रोनू हूँ उसके मामले में और उसे कहती हूँ की खबदार जो कभी रोई या डरी । इस भावनात्मक डर ने ही बेटियों के रास्ते कई जगह रोक कर रखे है , जब पता हो की दुनिया में कोई उसकी भावनाओ का कद्र नहीं करने वाला है तो वो रोना न सीखे वही भला , आप के परम के बदले में आप से कोई उतना ही प्रेम करे ये जरुरी नहीं , इससे अपना प्रेम कम नहीं करना चाहिए और सामने वाली से शिकायत भी नहीं । पर शायद हम बेटियों से ये उम्मीद नहीं करते है हम उनसे और ज्यादा प्रेम की उम्मीद करते है बेटो पति की बेरुखी झेल जाते है :)

kshama ने कहा…

Ye kahani nahi hai...asli ghatna hai.
Ab to pyarki ummeed karna band kar hai.Lekin betise bad tamizeeki ummeed nahi thi. Iske 2 articles chhodke maine chand maah pahle hui ghatnake bareme likha hai....zaroor padhen.

Shalini Kaushik ने कहा…

kshma ji kuchh kami rah gayi pyar me shayad varna betiyan to maa se bahut pyar karti hain kyonki ve janti hain maa ka man .vaise ek bat aur bhi hai ki har koi itna bhavuk nahi hota jitne ham .isliye ab beeti tahi bisar den .aur khush rahiye .

मैं और मेरा परिवेश ने कहा…

समय के साथ हमारी भावुकता मरने लगती है। कुछ खुशकिस्मत लोग ही होते हैं जिनमें यह जिंदा होती है। जब हम छोटे थे और घर वापस आते थे तो बुआ रोने लगती थीं। अब अपने ससुराल में मग्न हैं। कभी बुलाया नहीं। खुशी से विदा कर देती हैं। कोई दुख नहीं, कोई प्रेम नहीं। समय के साथ सारी कोमल भावनाएँ नष्ट हो जाती हैं।

vandana gupta ने कहा…

aapke dukh ko samajh sakti hoon .........aur kuch kahne ki mujhme himmat nahi ..............bas itna hi kahoongi jab wo aage badh gayi hai to aap bhi apni taraf dhyan dein .

Ramakant Singh ने कहा…

लगभग सभी जगह यही कहानी है शायद यही दस्तूर है

इस्मत ज़ैदी ने कहा…

आप तो माँ हैं न adjustment आप के ही हिस्से में आएगा उसे अपने हाल में ख़्श रहने दीजिये आप अपना ख़याल रखिये
वक़्त आने दीजिये उसे भी सब समझ में आएगा

डॉ. जेन्नी शबनम ने कहा…

क्षमा जी, बच्चे जब छोटे होते हैं तब उनकी दुनियाँ माँ तक सिमटी होती है. धीरे धीरे उनकी दुनिया बढ़ती है मगर माँ की वहीं ठहरी होती है. एक उम्र में बच्चे जिद्दी हो ही जाते हैं और माँ से बेबात उलझते हैं. सभी के साथ ऐसा ही होता है. शायद हमने भी ऐसा ही किया होगा, क्योंकि उस वक़्त यह समझ नहीं आता की ऐसा व्यवहार गलत है. अब वो अपनी दुनिया में रम गई है तो आप खुश रहिए. जब वो माँ बनेगी आपकी पीड़ा खुद ही समझेगी. शुभकामनाएँ.

आशा जोगळेकर ने कहा…

बेटी के पंखों में ताकत आ गई है खुश रहिये । बेटी बात बात पे आपका कधा रोने के लिये मागती तो क्या अ्चछा लगता ।
हमारे लिये जो भी नियोजित है वह तो हमें मिलता ही है । कभी कभी अपेक्षित से नियोजित कम रहता है ।