सोमवार, 9 सितंबर 2013

बिखरे सितारे १०:सितारोंसे आगे.


( पूजाकी ज़िंदगी पे उड़ एक चली गोली के दूरगामी असर हुए: अब आगे पढ़ें।)

जिस बच्चे को गोली लगी उसका क्या हुआ? उसे जाँघ पे गोली लगी। दादा जी ने निशाने बाज़ी में सिखा रखा था,वो काम आ गया...वरना लड़का जानसे जाता... पूजाके दादा जी ने उसे सही वक़्त पे अस्पताल पहुँचाया। वो बच गया। लेकिन उसके बापने सारी उम्र पूजाके परिवार को black मेल किया। हालाँकि,क़ानूनन ऐसी कोई ज़िम्मेदारी नही बनती थी, लेकिन वो १२ बच्चों का परिवार था। बाप तो शराबी थाही..पूजाके परिवार ने बरसों उन्हें साल भरका अनाज, दूध कपड़े आदि दिए। तीज त्यौहार पे पैसे भी देते रहे। चंद सालों बाद वो निकम्मा लड़का एक सड़क हादसे का शिकार होके मारा भी गया। परिवार मे से किसी बच्चे को काम करना ही नही होता...ये भी एक अजूबा था...!

एक बार लड़केका बाप उस लड़के को लेके, पूजाके तथा परिवार के फॅमिली डॉक्टर के पास पहुँचा। शिकायत ये कि, जबसे गोली लगी, लड़के को एक कान से सुनायी देना कम हो गया...! तबतक तो हादसे को छ: साल बीत चुके थे। डॉक्टर की शहर में बेहद इज्ज़त थी..गरीबों के डॉक्टर कहलाते थे।

इन डॉक्टर ने उस लड़के के गाल पे एक थप्पड़ लगाई और कहा," अब दूसरे कान को बहरा कर दिया मैंने...भाग जा..!"

खैर! पूजाके जीवन पे लौट चलती हूँ। पूजा छुट्टीयों में घर आने से पूर्व , दादा जी ने उस IAS के लड़के को एक पारिवारिक तस्वीरों का अल्बम दिखाया और,पूजाकी मंगनी की तस्वीरें भी दिखा दीं।

पूजा अन्यमनस्क स्थिती में छात्रावास से अपने घर पहुँची । अपनी मंगनी को लेके ज़्यादा समय वो अपने मंगेतर के परिवार को अंधेरे में नही रखना चाह रही थी। वैसे एक बात उसने मंगनी के पूर्व साफ़ कर दी थी...गर मंगनी और ब्याह के दौरान उसे एहसास हो की, क़दम सही नही है तो वो मंगनी तोड़ भी सकता है। मंगेतर की माँ, पूजाकी माँ की बचपन की सहेली थी। लड़का रईस घरका होनेके अलावा , commercial पायलट भी था। घरका अछा खासा व्यापार था। दिखने में काफ़ी अच्छा था। कई परिवार उस लड़के के लिए रुके थे। लेकिन विधिलिखित घटना होता है,तो, घटके रहता है।

पूजाने अपने परिवार को विश्वास में ले के मंगनी तोड़ दी। लड़के की माँ का दिल टूट गया। इस बहू को लेके बड़े सपने बुने थे। पूजा थी भी सरल स्वाभाव की और साफ़ मनकी। माँ, मासूमा ने भी, एक अलग से चिट्ठी लिख दी। पूजा के मनसे एक बोझ तो उतरा।

एक दिन पूजा के साथ उसके परिवारवाले उस डेप्युटी कलेक्टर के घर गए। पूजा पे जैसे जादू चल गया। एक दर्द से छूटी तो और एक दर्द सामने आ खड़ा हुआ...

लड़के की बातचीत परसे पता चल रहा था कि , उसका परिवार काफ़ी पुराने ख़यालात का है....अपनी माँ की वो हमेशा तारीफ़ करता...उनके अन्य लोगों को लेके सख्त मिज़ाज की बातें भी करता, लेकिन काफ़ी इतराके, अभिमान पूर्वक करता।

पूजा को उससे मिले २ माह भी नही हुए थे,कि, उसका तबादला मध्यवर्ती सरकार में हो गया। अन्न तथा कृषी मंत्रालय में...उसे देहली जाना था...पूजा के दादा का केस तो अबतक अटका ही था,लेकिन लड़के ने अधिकतर काम कर दिया था।

जैसे ही उस लड़के की तबादले की बात सुनी, पूजा टूट-सी गयी...माँ, मासूमा ने अपनी बेटी की मन की बात भाँप ली थी ..पूजा अपने आपको ना जाने कितने कामों में लगाये रखने लगी...एक दिन माँ ने उससे कहा....और जो कहा,वो एक अलग कहानी बन गयी....उस हादसे से आगे चलती हुई....

क्रमश:

बिखरे सितारे १०:सितारोंसे आगे.

6 टिप्‍पणियां:

mark rai ने कहा…

अच्छी कहानी .... रोचकता लिए हुए

ज्योति सिंह ने कहा…

jahan me kahani phir se taza ho chali ,kuchh,wakya dilchsp bhi raha,sundar

alka sarwat ने कहा…

आप बहुत प्रसिद्द कथाकार बनेंगी दीदी

मैं और मेरा परिवेश ने कहा…

virus se bhare system ki vajah se series nahi padh paya tha, bahut dino bad aa kar bahuut achchha laga

मैं और मेरा परिवेश ने कहा…

virus se bhare system ki vajah se series nahi padh paya tha, bahut dino bad aa kar bahuut achchha laga

आशा जोगळेकर ने कहा…

बहुत सुंदर जा रही है पूजा की कहानीष क्या हुआ फिर इस मंगनी का?