शनिवार, 29 अगस्त 2009

'बिखरे सितारे'..१०)पूजाके दादा और दादी...


इस समय दादी की उम्र थी ७४...पूजा के ब्याह के दिन ली गयी तस्वीर..अंदाज़ वही...शाहाना,लेकिन सादगी भरा ...

पहली तस्वीर में दादा नज़र आ रहे हैं...शेरवानी पहने हुए...अपनी लाडली पोती की बिदाई के लिए तैयार..पर मनमे दर्द छुपाये हुए...बारात के लिए रुके हुए...!

दादी की एक जवानी की तस्वीर पोस्ट करना चाह रही हूँ,जो हासिल नही हुई है,लेकिन जल्द ही होगी,ये उम्मीद है...मूर्तिमंत सादगी...!अपने पती के साथ रहते,रहते, वो पूरी तरह से उनके मौहौल में ढल गयीं...अंग्रेज़ी कपड़े तो जलाही दिए थे...साडियाँ , खादी, या हाथ करघेकी ही पहनती थीं..

जेवर .... कान में मोतीके टॉप्स..गलेमे सिर्फ़ जब कोई समारोह हो,तो मोती की माला..बस...

तसवीर के बारेमे : पूजा के ब्याह के दिन के कुछ लमहात...दादी रुकी हैं, हाथमे सादी-सी फूल माला लिए   हुए,बारात के इंतज़ार में...इन लमहात पे पहुँच ने में अभी समय है...एक हादसे की बयानी देनी है...एक टूटे रिश्तेके बारेमे बताना है....फिर आगे बढ़ना है..जहाँसे फिर कभी मुडा नही गया...लौटा नही गया...

दादा के चेहरे  पे एक मायूसी झलक रही है...जो वो छुपाना चाह रहे हैं...कोशिश करते जा रहे थे,लेकिन,पूजा को उनकी मनोदशा खूब पता थी...दोनों दादा-पोती एकदूसरेसे अपने बिछोह का गम छुपाये जा रहे थे...

7 टिप्‍पणियां:

शरद कोकास ने कहा…

जीवन के ये छोटे छोटे चित्र हैं लेकिन जीवन इन्हीमें मुस्कुराता है । अच्छा लगा पढ़कर ।

उन्मुक्त ने कहा…

क्षमा जी, यह पूजा कोई काल्पनिक चरित्र है, यह केवल कहानी है या आप की आपबीती है।

महफूज़ अली ने कहा…

haan dada ke chehre pe kuch khone ki mayusi dikh rahi hai.......

दिगम्बर नासवा ने कहा…

MAIN SHURU SE IS KAHAANI KO FOLLOW KAR RAHA HUN ....AAPNE POORI KAHAANI RACHI HAI YA KOI ASAL CHARITR HAI SAMAJHNA MUSHKIL HAI ..... SHAYAD YE BAAT AAPKO EK MAHAAN KALAMKAAR BANAATI HAI ...... ACHEE LAGI AAPKI KAHAANI .........

raj ने कहा…

dada dadi ki tasveere apke lafzo ne jo khinchi wo jyada achhi lagee...

Manoj Bharti ने कहा…

चित्र !!! एक चित्र हजार शब्दों की अभिव्यक्ति बनता है ... इस तथ्य को सत्य करती सुंदर अभिव्यक्ति ।

गौतम राजरिशी ने कहा…

दोनों तस्वीरें सब कुछ बयान कर रही हैं...