रविवार, 23 अगस्त 2009

'बिखरे सितारे' ८) नन्हीं पूजा तथा उसका घर



पूजा तब छ: माह की थी। उसका घर..जो दादा दादी ने बनाया...अफ़सोस वो घर अब वैसा रहा ही नही...न वो बरामदा रहा ना वो रूप...आज जब पूजा उस वास्तू को देखती है ,तो ,अपने दादा दादी को बेहद याद करती है...उस बरामदे के बिना उसे वो घर पराया-सा लगता है...एक जर्जर हुआ आशियाना..जिसकी खैर ख़बर किसीको नही.. ..सपनों में उसे इसी बरामदे में बैठे दादा दादी नज़र आते रहते हैं..

9 टिप्‍पणियां:

Babli ने कहा…

पूजा बहुत प्यारी और मासूम है ! घर तो बड़ा सुंदर है !

सुरेन्द्र "मुल्हिद" ने कहा…

nice picture and amazing thought kshama ji....
the instinct behind this is too pure and innocent...
keep rolling...amazing...

Mumukshh Ki Rachanain ने कहा…

ऐसा ही होता, चाहत सा ही हो तो फिर बात ही क्या.............
यही जिंदगी है, यही प्रभु कि लीला है, जीवन है तो फिर जब जैसा देखा, कुछ न कुछ तो विचार उठेंगे ही........

विनोद कुमार पांडेय ने कहा…

यह घर नही एक यादें है जो अनमोल है..
पूजा इन यादों को संभाल कर रखना...

विनोद कुमार पांडेय ने कहा…

sab kuch ishwar ke haath hota hai ..jald hi sab sahi ho jayega.
mai pooja ke liye bhagwaan se prathrana karata hoon ki jald se jald hi usaki sabhi pareshani door ho jayegi..

'अदा' ने कहा…

nanhi pooja aur uska ghar dono bahut khoobsurat...
jahir hai pooja bhi ab badal gayi hai....aur bhi khoobsurat ho gayi hai...
aur ghar bhi badal gaya hai ....samay ke saath...khoosurat na bhi ho to aramdayak hoga...
apna lo pooja...

महफूज़ अली ने कहा…

pooja bahut hi sunder........hai.......


haan! cheezen waqt ke saath badal jaatin hain........

Manoj Bharti ने कहा…

अतीत की यादें कहीं न कहीं हर मनुष्य को आती हैं ; कुछ अच्छी तो कुछ बुरी । अच्छी यादों को मनुष्य सहेज कर रखता है और बुरी घटनाओं को भूलाने की लाखों कोशिशों के बाद भी वे पीछा नहीं छोड़ती । यही मानवीय जीवन की त्रासदी है ।

गौतम राजरिशी ने कहा…

घर की तस्वीर तो अभी की ली हुयी लगती है...पूजा की हँसी कितनी प्यारी है !