गुरुवार, 30 दिसंबर 2010

दीपा 5

( गतांक: वो रात मेरी आँखों ही आँखों में गुज़री. डर,सदमा,गुस्सा....सब कुछ इतना था की, बता नही सकती. सुबह जब मैंने मेरे पतिसे रातवाली घटना के बारे में कहना चाहा तो जनाब ने कहा," अरे! वो तो मैही था! तुम्हें इतनी भी अक्ल नही?"
मैंने अपना सर पीट लिया!! ज़ाहिरन,उस आदमी को मेरे पति की शह थी. उसकी मर्ज़ी के बिना वो आदमी ऐसा क़दम उठाने की हिम्मत नही कर सकता था! "

किस्सा सुन मै दंग रह गयी! उफ़! कैसा पति था? और ये सब करने करवाने की वजह हम दोनों की  समझ के परे!!
अब आगे...
आगे बढ़ने से पहले आप सभी को नए साल की ढेरों शुभकामनाएँ देती हूँ!)

दीपाने कुछ देर रुक फिर आगे की बातें बताना शुरू कर दीं...
दीपा: " जब हम घर लौटे तो मैंने मेरी एक सहेली को इस घटना के बारेमे बताया. वह भी हैरान रह गयी...लेकिन उसने एक बात की ज़िद की....मैंने जाके स्त्री रोग विशेषग्य  को ज़रूर मिलना चाहिए...वह स्वयं मुझे ले जाने को तैयार थी.डॉक्टर से  उसकी अच्छी खासी  वाकफ़ियत  थी. वैसे मेरा भी किसी तग्य से बात चीत करने का बड़ा दिल कर रहा था. मै राज़ी हो गयी. "
मै:" तो तुमने सब कुछ अच्छे से डॉक्टर को बताया?"
दीपा:" हाँ! डॉक्टर ने मुझ से बहुत अलग,अलग सवाल किये. मेरी शादी से लेके उस घटना तक, उस ने सैकड़ों बातों का ब्यौरा लिया.
हम पति-पत्नी के शारीरिक संबंधों को लेके भी उसने बहुत सारे सवाल पूछे. सच कहूँ,तो मुझे इन संबधों के बारे में बहुत कम जानकारी थी. उसकी बातों परसे मुझे एहसास हुआ की,हम दोनोमे शारीरिक सम्बन्ध ना के बराबर हैं!
तक़रीबन एक घंटे से अधिक बात चीत के पश्च्यात उसने कहा, तुम्हारा पति homosexual है. मैंने तो ये शब्द ही तब तक नही सुना था! 
एक ओर मुझे अपने माता-पिता पे बेहद गुस्सा आ रहा था,की, उन्हों ने बेहद जल्दबाजी में मेरा रिश्ता तय कर दिया! जब कभी मैंने उन्हें मुझपे होनेवाले अत्याचारों   के बारेमे बताना चाहा,उन लोगों ने अनसुना कर दिया.
मैंने इस घटना के बारे में भी उनको बताने का निर्णय ले लिया."
मै:" तो तुमने बताया? और उनकी क्या प्रतिक्रया हुई?"
दीपा:" बताया. मैंने जी जान तोड़ के बताया. रो,रो के कहा की इस व्यक्ती से मेरा पीछा छुड़ाया जाय. मेरे मामा भी वहीँ थे. मेरे माता पिता को लगा की,मै सब कुछ मन गढ़ंत बता रही हूँ! बल्कि मेरे मामा ने उनसे कहा, हमारी अपनी बेटी है...इतनी जी जान से बता रही है,तो झूठ कैसे हो सकता है?"
मै:" हद है! तुम्हारे माता-पिता ने तुम्हारा विश्वास नही किया?"
दीपा:" नही, मेरे माता पिता को लगा की मै अपनी शादी निबाहना नही चाहती,इसलिए मनगढ़ंत किस्सा बयाँ कर रही हूँ!मुझे उस वक़्त इतना गुस्सा आया! मैंने उनसे कहा,एक दिन ये आदमी बेहद बुरी मौत मरेगा! एक दिन आपको विश्वास करना ही पडेगा,लेकिन तब तक बड़ी देर हो चुकी होगी...और मेरी ये तिलमिलाके कही गयी भविष्य वाणी सच निकली.....!खैर!

मेरे बारे में ये बात मेरी उस सहेली ने मेरे बचपन के दोस्त,अजय को भी बता दी. अजय ने ब्याह नही किया था. वो अचानक एक दिन मेरे पास पहुँचा और कहने लगा, तुम अपने बच्चों को लेके इस घर से निकल पड़ो. छोड़ दो ऐसे आदमी को...अलग हो जाओ...मै तुम से ब्याह करूँगा....अब तो मेरे पास अच्छी खासी नौकरी भी है. तुम्हारे बच्चों को पिता का प्यार भी मिलेगा....!"
मै:" ओह! अजय ने तो सच्चा प्यार निभाया! तुम्हारे साथ  को परे कर खड़ा हो गया! आगे क्या हुआ?"
दीपा:" बताती हूँ...बताती हूँ...!"
क्रमश:

21 टिप्‍पणियां:

चला बिहारी ब्लॉगर बनने ने कहा…

एक नया मोड़.. एक नया धोखा!! मैं अनुमान लगा रहा हूँ!!

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

अभी बस चुपचाप पढते चले जाने का ही मन है. कमेंट बाद में, विस्तार से.

दीपक 'मशाल' ने कहा…

Ma'am I'm very sorry to say lekin isiliye kahani ka har bhaag alag-alag nahin padhta kyonki aapki likhi kahani itni rochak hoti hain ki ek baar shuru ho jaaye to kramshah word fir aise lagta hai jaise June ki dopahar me sooraj. :(
ye sabhi 5 bhaag padh liye, agla bhaag jaldi chahta hoon please......
My best wishes for the new year. :)

pragya ने कहा…

कभी-कभी माता-पिता अपने बच्चों पर कितना अविश्वास कर लेते हैं और बस अपनी ज़िन्दगी में किसी परेशानी से बचने के लिए बच्चो की ज़िंदगी नरक बना देते हैं...

vandan gupta ने कहा…

ज़िन्दगी एक धोखा ही तो है शायद ऐसे लोगो के लिये…………कहानी बेहद रोचक चल रही है ज़रा जल्दी जल्दी लगाया करो……………नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनायें।

डॉ. मनोज मिश्र ने कहा…

बहुत सुंदर श्रृंखला,जारी रहे.
नव वर्ष की मंगलमय शुभकामना.

यशवन्त माथुर (Yashwant Raj Bali Mathur) ने कहा…

आप को सपरिवार नववर्ष 2011 की हार्दिक शुभकामनाएं .

मनोज कुमार ने कहा…

सर्वस्तरतु दुर्गाणि सर्वो भद्राणि पश्यतु।
सर्वः कामानवाप्नोतु सर्वः सर्वत्र नन्दतु॥
सब लोग कठिनाइयों को पार करें। सब लोग कल्याण को देखें। सब लोग अपनी इच्छित वस्तुओं को प्राप्त करें। सब लोग सर्वत्र आनन्दित हों
सर्वSपि सुखिनः संतु सर्वे संतु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यंतु मा कश्चिद्‌ दुःखभाग्भवेत्‌॥
सभी सुखी हों। सब नीरोग हों। सब मंगलों का दर्शन करें। कोई भी दुखी न हो।
बहुत अच्छी प्रस्तुति। नव वर्ष 2011 की हार्दिक शुभकामनाएं!

साल ग्यारह आ गया है!

संहिता ने कहा…

क्षमा जी , नव वर्ष की हार्दिक शुभ कामनाए |
दीपा-6 के इंतज़ार मे !!!

ज्योति सिंह ने कहा…

itne dino baad lauti hoon main pahle naye barsh ki mubarakbaad kabool kare phir aati hoon sabko badhai dekar padhne .happy new year .

केवल राम ने कहा…

बहुत दिनों से इंतज़ार था ...पढ़कर कुछ भी न कहने को मन हुआ ...बस संजो लिए एहसास ...शुक्रिया

केवल राम ने कहा…

नव वर्ष 2011 की हार्दिक शुभकामनायें ......स्वीकार करें ..

Alpana Verma ने कहा…

नववर्ष 2011 आपके व आपके परिवार
के लिए ढेरों प्रसन्नताएं लाए ,शुभकामनाएँ.

Kunwar Kusumesh ने कहा…

नए साल की हार्दिक शुभकामनायें .
ब्लॉग पर आने के लिए आभारी हूँ.

उम्मतें ने कहा…

ये कहना तो मुश्किल है कि पति से सम्बन्ध 'बराबर/सहज 'नहीं थे,क्योंकि बच्चे तो हुए ही ! बहरहाल डाक्टर ने कहा है तो मान लेते हैं कि सम्बन्ध ना के बराबर थे पर एक कारण हमें भी समझ में आ रहा है ! देखते हैं कि आगे क्या होता है!

Asha Joglekar ने कहा…

आज पिछले सारे भाग पढें । कहानी सही जा रही है । आगे की प्रतीक्षा है । नया साल शुभ हो, मंगल हो ।

अनामिका की सदायें ...... ने कहा…

kya saari kahani padh li aur ab batati hun...batati hun kah kar band kar di.....kab bataogi ?????????
bahut hi interesting kahani hai. jaldi agli kadi post kijiye.

ktheLeo (कुश शर्मा) ने कहा…

नववर्ष की मंगल कामना!

Dr. Zakir Ali Rajnish ने कहा…

क्षमा जी, बहुत ही रोचक कहानी है। आप कहती रहें, सुन रहे हैं हम।

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मिल गया खुशियों का ठिकाना।
वैज्ञानिक पद्धति किसे कहते हैं?

सदा ने कहा…

बहुत ही रोचक लगा यह भाग ।

M VERMA ने कहा…

मैं भी आमतौर पर धारावाहिक कथाओं को एकसाथ पढने को आदी हूँ .. रोचकता बनी हुई है.