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शुक्रवार, 2 मार्च 2012

दिलका दौरा

दिलके दौरे के बाद घर आ गयी थी. आज पहली बार डॉक्टर से मिलने गयी. बातों बातों में पता चला की,मुझे ताउम्र अब चंद दवाइयाँ लेनी होंगी और चंद दवाइयाँ ताउम्र ले नही सकती. दोनों बातों से परेशान हूँ.सरदर्द की ( migraine )की पुरानी मरीज़ हूँ.मर्ज़ इस क़दर है  की मुझे morphene  तक लेनी पड़ती थी तब जाके दर्द से निजात मिलती! अब डिस्पिरिन से काम कैसे चल सकता है?दिल के दौरे का कारन इन्हीं दवाईयों को ठहराया जा रहा है!एक ओर कुआ दूसरी ओर खाई! अस्पताल से लौटी तब सरदर्द इतना था की दर्द की दवाई चोरी छुपे खाही ली! भविष्य में भुगतना तो मुझे ही पड़ेगा और कैसे वो कह नही सकती! क्या करूँ क्या न करूँ?

जो दवाई ताउम्र लेनी पड़ेगी वो है एस्पिरिन! जिसे blood  thinner  के तौरपे इस्तेमाल किया जाता है. जिसका मतलब होता है मुझे सुई चुभने से या रसोई में उँगली कट जाने से भी बचाना होगा वरना खून बहने लगा तो रुकेगा नहीं!

मेरे मर्ज़ के बारेमे जान के माँ तो बहुत परेशान हैं. खराब तबियत के बावजूद मुझसे मिलने आ रही हैं.
शायद ये सब सहने की बातें हैं,कहने की नही,लेकिन ब्लॉगर दोस्तों से साझा किये  बिना रह भी नही सकती! अब की होली जीवन का ये रंग भी दिखा रही है!


मंगलवार, 21 फ़रवरी 2012

दिलका दौरा 2

बेटे ने ambulance  बुला ली. १० मिनट में ambulance  हाज़िर हो गयी. उसके साथ आये doctors  ने मेरा खून आदि  चेक किया और ambulance  में तुरंत डाल के अस्पताल की तरफ रवाना हो गए.

क्रमश:

( क्रमश: इसलिए की इस समय भी थकान के कारण मुझसे अधिक लिखा नही जा रहा. अब आगे.....)



अस्पताल पहुँचने से पूर्व  बेटे ने मेरी एक डॉक्टर सहेली फोन लगाया. वो अंडमान में छुट्टीयाँ मना रही थी. उसे खबर मिलतेही उसने अस्पताल की cardiologist  को फोन मिलाया. वो महिला डॉक्टर घर लौट रही थीं.उन्हों ने तुरंत गाडी घुमाई और मेरे पहुँचने के पहले अस्पताल में पहुँच गयीं.

आपातकालीन विभाग में पहुंचतेही तरह तरह के टेस्ट शुरू हो गए. मुझे एक injection  दिया गया. मूह में दवाइयाँ डाल दी गयीं. अब खून लेना था नसमे से. मेरी नसे मिलना एक महत्प्रयास है. कुछ १२ लोगों ने कोशिश की तब जाके एक नस मिली. खून खींचा गया....वहीं IV  लगा दी गयी. ECG  लिया जा रहा था. पहले ECG  में पता चला की ये दौरा पहला नहीं था. इसके पहले पड़ चुका था.उस कारन जो damages  हो गए थे उन्हें पूर्ववत करना मुमकिन नहीं था. ये सब बातें मेरे बेटे तथा बहन को बताईं जा रही थी. एक रात के लिए तो उन्हों ने मुझे रूम में रखने की सोची,जबकि मैने घर जाने की रट लगाई हुई  थी.

खैर! उस रात बहन मेरे साथ रुक गयी. दूसरे दिन सुबह्से फिर एकबार टेस्ट शुरू हो गए. जैसे,जैसे टेस्ट होते जा रहे थे,मुझे doctors के  चेहरे गंभीर होते नज़र आ रहे थे. फिर बहन तथा बेटेसे बताया गया की अब तुरंत ICU  में शिफ्ट करना है. OT  तैयार रखा  जाये.अब मेरे पति जो शहर में नहीं थे,उन्हें तुरंत बुला लिया गया!

क्रमश:( इसके लिए माफी चाहती हूँ!)