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अध्याय २ : बिखरे सितारे ७ : मझधार में
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शनिवार, 29 अगस्त 2009
' बिखरे सितारे ' ११) जब रौनक़ बसा करती थी...!
अब वो बगीचे नहीं, वो बेले और पेड़ उखड गए...एक वीरानगी-सी छाई रहती है...बेआराम बन मकान गया तो,माँ पिताजी को वहाँ हटके अलगसे एक छोटा घर बनाना पड़ गया...खैर अभी इस बात तक पहुँचने में समय है..!
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